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Free article · Shiv Ji · 7 min read

सोमवार व्रत की विधि और नियम (सोलह सोमवार सहित)

सोमवार को शिव जी की पूजा कैसे करें, व्रत में क्या खाएँ, और सोलह सोमवार व्रत कब शुरू करें व उद्यापन कैसे करें।

By DevGranth · 2 November 2026

सोमवार व्रत क्यों रखा जाता है

सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। बहुत से लोग हर सोमवार शिव जी की पूजा और व्रत करते हैं, कुछ केवल सावन के सोमवार रखते हैं, और कुछ संकल्प लेकर सोलह सोमवार का व्रत करते हैं।

परंपरा में सोमवार व्रत के तीन रूप बताए जाते हैं: हर सप्ताह का सामान्य सोमवार व्रत, सौम्य प्रदोष (जब प्रदोष तिथि सोमवार को पड़े) और सोलह सोमवार। तीनों की पूजा-विधि लगभग एक जैसी है; अंतर संकल्प और कथा में है।

सावन का महीना शिव जी का प्रिय माना जाता है, इसलिए सावन के सोमवारों पर मंदिरों में विशेष भीड़ रहती है और बहुत से लोग इसी महीने से सोमवार व्रत शुरू करते हैं। पर व्रत का भाव किसी एक महीने तक सीमित नहीं है। शिव जी को भोलेनाथ कहा जाता है: वे एक लोटा जल और सच्चे मन से भी प्रसन्न होते हैं। इसलिए सामग्री कम हो तो चिंता न करें; श्रद्धा और नियमितता ही सबसे बड़ी पूजा है।

पूजा सामग्री

  • शुद्ध जल या गंगाजल से भरा लोटा।
  • कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत के लिए)।
  • बेलपत्र (तीन पत्तियों वाले, साबुत और साफ़)।
  • सफ़ेद फूल, धतूरा, आक के फूल और भांग (जो उपलब्ध हो)।
  • चंदन, अक्षत (साबुत चावल), जनेऊ और मौली।
  • धूप, दीपक, कपूर और भोग के लिए फल या मिठाई।

सोमवार व्रत की विधि

  1. 1सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ कपड़े पहनें।
  2. 2हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें: अपना नाम लें और कहें कि आप शिव जी की प्रसन्नता के लिए आज का व्रत कर रहे हैं।
  3. 3घर या मंदिर में शिवलिंग पर पहले जल, फिर दूध, फिर पंचामृत और अंत में फिर से शुद्ध जल चढ़ाएँ।
  4. 4चंदन लगाएँ, फिर बेलपत्र (चिकनी सतह शिवलिंग की ओर), फूल, धतूरा और अक्षत अर्पित करें।
  5. 5धूप-दीप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें; 108 बार जप करना प्रचलित है।
  6. 6सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें, फिर शिव जी की आरती करें।
  7. 7शिव जी के साथ माता पार्वती और गणेश जी की भी पूजा करें।
  8. 8शाम को फिर दीपक जलाकर आरती करें और उसके बाद भोजन ग्रहण करें।

व्रत में भोजन के नियम

  • ज़्यादातर लोग दिन में फलाहार लेते हैं और शाम की पूजा के बाद एक बार भोजन करते हैं।
  • भोजन सात्विक रखें: प्याज़, लहसुन और मांसाहार न लें। कई परिवार नमक भी नहीं लेते, या सेंधा नमक लेते हैं।
  • दूध, फल, साबूदाना, मखाना और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की चीज़ें आम तौर पर ली जाती हैं।
  • पूजा से जुड़ी परंपरा: शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी, सिंदूर और केतकी का फूल नहीं चढ़ाए जाते।
  • स्वास्थ्य कारणों से व्रत कठिन हो तो फलाहार लेते हुए व्रत रखें, और ज़रूरत हो तो डॉक्टर से पूछें।

सोलह सोमवार व्रत

सोलह सोमवार का अर्थ है लगातार सोलह सोमवार तक संकल्प के साथ व्रत रखना। बहुत सी कन्याएँ, महिलाएँ और पुरुष भी इसे श्रद्धा से रखते हैं। इसकी शुरुआत आम तौर पर सावन, कार्तिक, चैत्र या मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से की जाती है; पंचांग देखकर या पंडित जी से पूछकर दिन तय करें।

  • पहले सोमवार को संकल्प लें कि आप सोलह सोमवार व्रत रखेंगे।
  • हर सोमवार ऊपर दी गई विधि से पूजा करें और सोलह सोमवार व्रत कथा पढ़ें।
  • परंपरा में प्रसाद के रूप में गेहूँ के आटे, घी और गुड़ का चूरमा बनाया जाता है, जिसके तीन भाग किए जाते हैं: एक भगवान को, एक बाँटने के लिए, और एक स्वयं ग्रहण करने के लिए।
  • बीमारी, यात्रा या मासिक धर्म के कारण कोई सोमवार छूट जाए, तो घबराएँ नहीं; उसे बाद में जोड़कर गिनती पूरी कर लें, या अपने घर की परंपरा के अनुसार करें।

उद्यापन

सोलह सोमवार पूरे होने के बाद सत्रहवें सोमवार को उद्यापन किया जाता है। इस दिन विधि से शिव-पार्वती की पूजा होती है, हवन किया जाता है (जो कर सकें), चूरमे का प्रसाद बनता है, और ब्राह्मण या ज़रूरतमंदों को भोजन और दान दिया जाता है। उद्यापन बड़ा या खर्चीला होना ज़रूरी नहीं; अपनी सामर्थ्य के अनुसार, सादगी से किया गया उद्यापन भी पूरा माना जाता है।

कथा और पूरी विधि

सोमवार व्रत की पूरी विधि और कथा हमारी ई-बुक ‘सोमवार व्रत कथा और पूजा विधि’ में है। शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र और महाशिवरात्रि पूजा विधि भी चाहिए, तो ये सब शिव पैक में एक साथ मिलती हैं।

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