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नवरात्रि कलश स्थापना विधि: सामग्री और सही तरीका

घटस्थापना की पूरी सामग्री सूची, जौ बोने से नारियल रखने तक का क्रम, नौ दिन की देखभाल और विसर्जन की विधि।

By DevGranth · 1 November 2026

कलश स्थापना क्या है

नवरात्रि के पहले दिन, यानी प्रतिपदा को, घर में कलश स्थापित करके माँ दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इसे घटस्थापना भी कहते हैं। कलश को सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना गया है, और नौ दिन की पूजा इसी के सामने होती है।

साल में दो मुख्य नवरात्रि मनाई जाती हैं: चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर)। दोनों में कलश स्थापना की विधि एक जैसी है।

कलश स्थापना का मुहूर्त

कलश स्थापना प्रतिपदा तिथि में, सुबह के शुभ मुहूर्त में की जाती है। हर साल और हर शहर के लिए यह समय अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें। सुबह का मुहूर्त निकल जाए तो दोपहर का अभिजीत मुहूर्त भी अच्छा माना जाता है। बहुत से पंचांग चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के समय स्थापना न करने की सलाह देते हैं; पंचांग में यह भी लिखा होता है।

अगर घर में जगह कम है, आप यात्रा पर हैं, या पूरे नौ दिन कलश की देखभाल संभव नहीं, तो चिंता न करें। माँ की तस्वीर के सामने रोज़ दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा या आरती करना भी पूरी श्रद्धा वाली पूजा है। कलश स्थापना एक सुंदर परंपरा है, पर भक्ति उससे बड़ी है।

सामग्री सूची

  • मिट्टी, ताँबे या पीतल का कलश।
  • कलश में भरने के लिए शुद्ध जल और थोड़ा गंगाजल।
  • आम या अशोक के पाँच या सात पत्ते।
  • जटा वाला सूखा नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी और मौली (कलावा)।
  • सुपारी, एक सिक्का, अक्षत (साबुत चावल), दूर्वा, हल्दी की गाँठ और रोली।
  • जौ बोने के लिए मिट्टी का चौड़ा पात्र, साफ़ मिट्टी और जौ।
  • लकड़ी की चौकी, उस पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा, और माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति।
  • घी का दीपक (अखंड ज्योति रखनी हो तो बड़ा दीपक), धूप, फूल, माला, फल और मिठाई।
  • माता के लिए श्रृंगार का सामान और चुनरी।

कलश स्थापना की विधि

  1. 1स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। घर का उत्तर-पूर्व कोना (ईशान कोण) पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है; उस जगह को साफ़ करके गंगाजल छिड़कें।
  2. 2चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएँ और माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  3. 3मिट्टी के पात्र में साफ़ मिट्टी की परत बिछाएँ, उस पर जौ फैलाएँ, फिर थोड़ी मिट्टी और डालें और हल्का पानी छिड़कें।
  4. 4कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएँ और गले में मौली बाँधें।
  5. 5कलश में जल और थोड़ा गंगाजल भरें। उसमें सुपारी, सिक्का, अक्षत, दूर्वा और हल्दी की गाँठ डालें।
  6. 6कलश के मुँह पर आम के पत्ते इस तरह रखें कि उनके डंठल अंदर की ओर रहें।
  7. 7नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर मौली से बाँधें और पत्तों के ऊपर कलश पर रखें; नारियल का मुँह (जटा वाला भाग) आपकी ओर रहे।
  8. 8कलश को जौ वाले पात्र के बीच में या चौकी पर माता की दाईं ओर स्थापित करें।
  9. 9सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें, फिर हाथ में जल और अक्षत लेकर नौ दिन की पूजा का संकल्प लें और माँ दुर्गा का आह्वान करें।
  10. 10दीपक जलाएँ, कलश और माता को रोली, अक्षत, फूल, चुनरी अर्पित करें, भोग लगाएँ और आरती करें।

नौ दिन तक क्या करें

  • रोज़ सुबह-शाम कलश और माता के सामने दीपक जलाकर पूजा और आरती करें।
  • जौ के पात्र में रोज़ थोड़ा पानी छिड़कें; कुछ दिनों में हरे जवारे उग आते हैं।
  • हर दिन माँ के उस दिन के स्वरूप (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक) का ध्यान करें।
  • अखंड ज्योति जलाई है तो ध्यान रखें कि घी या तेल खत्म न हो, और उसे खुले दरवाज़े या हवा से बचाकर रखें।
  • कलश को नौ दिन तक उसकी जगह से न हिलाएँ।
  • अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करें, जैसा आपके घर की परंपरा हो।

समापन और विसर्जन

नवमी की पूजा या दशमी के दिन कलश का विसर्जन किया जाता है। माता की आरती करके क्षमा-प्रार्थना करें। कलश का जल आम के पत्तों से पूरे घर में छिड़कें और बचा जल किसी पौधे में डाल दें। नारियल को प्रसाद के रूप में परिवार में बाँटा जाता है।

जवारे किसी साफ़ बहते जल में प्रवाहित करें, या जहाँ यह संभव न हो वहाँ गमले या पेड़ की मिट्टी में रख दें। कई घरों में कुछ जवारे प्रसाद की तरह पूजा स्थान पर रखने की भी परंपरा है।

नौ दिन की पूरी पूजा विधि

कलश स्थापना से लेकर हर दिन के स्वरूप की पूजा, कन्या पूजन और विसर्जन तक की पूरी विधि और कथा हमारी ई-बुक ‘नवरात्रि पूजा विधि’ में है। दुर्गा चालीसा, आरती और दुर्गा सप्तशती का सार भी चाहिए, तो ये सब देवी पैक में एक साथ मिलते हैं।

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